शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

छायावाद


जब झिझक हो
संकोचवश
कुछ कह न पाओ
जब हृदय की बात को
तुम जीभ पर
बिल्कुल न लाओ
जब हृदय में कोई कर ले घर
बिन पूछे बताये
और तुम उसको छिपाओ
न भटको सत्य से
पर सत्य का आभास तुम सबको कराओ
तो समझो हो गई अनुकूल जलवायु
छायावाद को।

2 टिप्‍पणियां:

PRATUL ने कहा…

त्रुटि संशोधन ....

... और तुम उसको छुपाओ।

सच्चाई कहते जब लगे डर

हर बात को थोड़ा घुमाओ

... न भटको सत्य से

पर सत्य का आभास तुम सबको कराओ।

लेखक : प्रतुल वशिष्ठ

Divya ने कहा…

... न भटको सत्य से

पर सत्य का आभास तुम सबको कराओ।

Awesome !